Monday, August 13, 2012

जो युवा अपने मोह को काबू न कर पाएं वो संघर्ष ,सामाजिक -राजनैतिक -प्रशासनिक व्यवस्थापरिवर्तन ,भ्रष्टाचार उन्मूलन ,भय -भूख से मुक्ति के जैसे दिवास्वप्न न देखें ..
देशभक्ति की उत्साही शुरूआत तो नारे लगाने से की जा सकती है पर राष्ट्रप्रेम का रास्ता स्वयं की कुर्बानी से
होकर जाता है जिसमें आपको अपने निज सुख और ऐश्वर्य गंवाने पड़ते हैं ....एक बार सोचें कि राष्ट्रप्रेम की बातें आपके लिए कहीं एक सा काम कर

ते -करते,एक सी पब ,पार्टी
,डांस की बोरिंग लाइफ स्टाइल जीते -जीते या फ्रेंड्स ,गर्लफ्रेंड्स की चीटिंग फैमिली प्रॉब्लमस इन रिलेशंस या कैरियर और
अनइम्प्लोयमेंट की चिंता से ऊबकर इमोशनल मूड चेन्जिंग टाईमपास तो नहीं ??? या कि फिर जीवन का सुदीर्घ कालिक पवित्र लक्ष्य है ?
वैसे दोनों में कोई बुराई नहीं है एक सपोर्टर होता है और एक क्रियेटर ..
मनुष्य जीवन सिर्फ और सिर्फ एक बार ही मिलता है आपको अपनी मर्जी से जीने का पूरा- पूरा हक है ..
बस निवेदन इतना भर है कि अगर ये केवल टाईमपास है यानि अगर आप सपोर्टिंग रोल में हैं तो ज्यादा परेशान मत हों ..निराश न हों ..और डिप्रेस्ड होकर आस -पास का वातावरण निराशाजनक न बनाएं ..
कोई आन्दोलन या सुधार दो मिनट के मैगी नूडल्स बनाने जितना आसान नहीं होता यह एक जीवन पर्यन्त चलने वाला यज्ञ होता है तब कहीं जाकर अगली पीढी मज़े लेती है यही सब तयकर आज़ादी के दीवानों नें भी बलिदान किया था तभी हम सब आज स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मज़े ले रहे हैं .. पर उन आज़ादी के दीवानों को उनकी ज़िन्दगी में कुछ नहीं मिला ..ये बात सदा स्मरण रखें ..हम निराश इसलिए हो जाते हैं क्यूंकि हम हथेली पर सरसों उगाना चाहते हैं ..
BE SENSITIVE......BE DEMOCRATIC......BE AN INDIAN NATIONAL