Wednesday, March 30, 2016

अपनी ज़ात-अपने धर्म-अपनी पार्टी के लिए नही..अपने देश के लिए वोट करें


नयी नयी सरकारें चाहे किसी के नेतृत्व में बने ,कितना भी ईमानदार CM PM हो वो केवल मुखौटा तो हो सकता है सरकार का ..लेकिन पूरी सरकार नहीं
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नयी सरकार कोई भी प्रशासनिक सुधार /पुलिस सुधार /शैक्षिक सुधार /आफिस सिस्टम में सुधार नहीं कर पायेगी क्यूंकि हर बार की तरह नयी सरकार भी ऐसे विधायक सांसदों से बनेगी जो जनहित में नहीं बल्कि अपने फ़ायदे के लिए करोड़ों खर्च करके चुनाव जीतेंगें
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जब तक सरकार निर्माण की इकाई एक-एक MLA /MP खुद अच्छा नहीं होगा अच्छी सरकार की कल्पना भी अर्थहीन है | सरकारी मंत्रालयों के टीवी और अखबारी विज्ञापन के कलर बदलने या उनकी भाषा का फ्लेवर बदलने या चली आ रहीं पिछली सरकारी योजनाओं के नामकरण बदलने से व्यवस्था में फर्क कैसे आएगा,आप ही सोचिये
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कृपया याद रखिये कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक विस्तृत विविधतापूर्ण धार्मिक भौगोलिक संस्कृतियों के भारतीय संसदीय लोकतंत्र को एक अधिनायक प्रवृत्ति अपने हिसाब से कभी नही चला सकती और ये बात आप अगले पांच साल के सरकार के कार्यकाल को देखकर खुद ही समझ जायेंगे
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आप लोकतंत्र को स्वयं समझने की चेष्टा करें इसमें तन मन धन से समय निकालकर भागीदार बनें न कि इसे राजनैतिक दलों के हिसाब से समझें
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मित्रों आगामी विधानसभा चुनावों और आगामी लोकसभा चुनाव में ईमानदार संसद के गठन के लिए अपनी कमर आज से ही कसें |
आपका ध्येय केवल सादगीपूर्ण ईमानदार व्यक्ति को वोट देना होना चाहिए

Friday, March 18, 2016

#देशभक्ति_के_नारे_लगाने_भर_से_भारत_एक_नहीं_हो_सकता #जाति_सम्प्रदाय_के_दीमक_से_निपटना_पड़ेगा

भारत माता की जय कहना/वंदेमातरम बोलना यदि देशभक्ति के लिए जरा भी ज़रूरी होता तो संविधान में इसकी व्यवस्था की जाती और हम नागरिकों को इस बात की भी अक्ल ज़रूर होनी चाहिए कि संविधान निर्माता विश्वविख्यात कानूनविद थे और हम लोगों से कई करोड़ प्रकाशवर्ष (लाईट ईयर ) अधिक देशभक्त थे ,फिर भी उन्होंने नारेबाज़ी को व्यवस्था बनाना गैरज़रूरी समझा तो उसका यही कारण होगा जो कि मैं इन हालातों से समझ रहा हूँ और वो ये कि उन्हें संदेह था कि नारों का इस्तेमाल करने वाले देश प्रेम और भाईचारे के लिए नहीं बल्कि नारों से नागरिकों के बीच दहशत और नफ़रत के अंगारे भड़काएंगे,जो कि सामने है
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हालांकि निजी रूप से मुझे भारत माता की जय बोलने में/वन्देमातरम कहने में गुड फीलिंग आती है लेकिन ये मेरी मनःस्थिति का पक्ष है और इसे सारे नागरिकों पर मोरल पोलिसिंग करके थोपना गैरज़रूरी काम है
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बाग़ से उठने वाली ताज़ा फूलों की महकती खुशबु और उन्हीं फूलों के सड़ जाने पर उनके ढेर से उठती सडांध में बहुत अंतर होता है
क्या वर्तमान में इन नारों के शोर में आपको कहीं से भी ताज़ा बाग़ के फूलों जैसी खुशबु आ रही है ? भारत से प्रेम करते हैं तो एकबार खुद से प्रश्न कीजिये


#देशभक्ति_के_नारे_लगाने_भर_से_भारत_एक_नहीं_हो_सकता  #जाति_सम्प्रदाय_के_दीमक_से_निपटना_पड़ेगा
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जो भारतीय नागरिक  अलग अलग जातियों की अपनी विशिष्ट पहचान बनाये रखने में विश्वास रखते हैं
उन्हें किसी को देशद्रोही कहने का रत्ती भर अधिकार नहीं क्यूंकि वो जातियों में राष्ट्र शक्ति को बांटकर देश को अंदर से तोड़ने का ही काम कर रहे हैं

Monday, August 13, 2012

जो युवा अपने मोह को काबू न कर पाएं वो संघर्ष ,सामाजिक -राजनैतिक -प्रशासनिक व्यवस्थापरिवर्तन ,भ्रष्टाचार उन्मूलन ,भय -भूख से मुक्ति के जैसे दिवास्वप्न न देखें ..
देशभक्ति की उत्साही शुरूआत तो नारे लगाने से की जा सकती है पर राष्ट्रप्रेम का रास्ता स्वयं की कुर्बानी से
होकर जाता है जिसमें आपको अपने निज सुख और ऐश्वर्य गंवाने पड़ते हैं ....एक बार सोचें कि राष्ट्रप्रेम की बातें आपके लिए कहीं एक सा काम कर

ते -करते,एक सी पब ,पार्टी
,डांस की बोरिंग लाइफ स्टाइल जीते -जीते या फ्रेंड्स ,गर्लफ्रेंड्स की चीटिंग फैमिली प्रॉब्लमस इन रिलेशंस या कैरियर और
अनइम्प्लोयमेंट की चिंता से ऊबकर इमोशनल मूड चेन्जिंग टाईमपास तो नहीं ??? या कि फिर जीवन का सुदीर्घ कालिक पवित्र लक्ष्य है ?
वैसे दोनों में कोई बुराई नहीं है एक सपोर्टर होता है और एक क्रियेटर ..
मनुष्य जीवन सिर्फ और सिर्फ एक बार ही मिलता है आपको अपनी मर्जी से जीने का पूरा- पूरा हक है ..
बस निवेदन इतना भर है कि अगर ये केवल टाईमपास है यानि अगर आप सपोर्टिंग रोल में हैं तो ज्यादा परेशान मत हों ..निराश न हों ..और डिप्रेस्ड होकर आस -पास का वातावरण निराशाजनक न बनाएं ..
कोई आन्दोलन या सुधार दो मिनट के मैगी नूडल्स बनाने जितना आसान नहीं होता यह एक जीवन पर्यन्त चलने वाला यज्ञ होता है तब कहीं जाकर अगली पीढी मज़े लेती है यही सब तयकर आज़ादी के दीवानों नें भी बलिदान किया था तभी हम सब आज स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मज़े ले रहे हैं .. पर उन आज़ादी के दीवानों को उनकी ज़िन्दगी में कुछ नहीं मिला ..ये बात सदा स्मरण रखें ..हम निराश इसलिए हो जाते हैं क्यूंकि हम हथेली पर सरसों उगाना चाहते हैं ..
BE SENSITIVE......BE DEMOCRATIC......BE AN INDIAN NATIONAL
## " यदा-यदा हि धर्मस्य " ##

कल आधी रात तक जाग कर मटकी -बटकी फोड़-फाड़ कर कान्हां की डिलीवरी तो करा दी भाई बड़ी मेहनत से !चलो एक बड़ा काम निपटा |

@ अब आइये उनके बड़े होकर सुदर्शन चक्र धारी कृष्ण बनने तक चुप्पी साध जाते हैं ?
भाई तभी तो वो हमारे " यदा-यदा हि धर्मस्य " के तोता रटंत सपने को पूरा करेंगे, समाज के भ्रष्टाचारियों और हमारी मासूम बहिन बेटियों के बलात्कारियों का वध करेंगे ?
खैर आइये अपन लोग

तो
अब

आने वाली नवरात्रि की तैयारी करते हैं ...आखिर दुर्गा माँ जी की दुष्टों के संहार करने की शक्ति का भी तो आवाहन करना है ...व्रत ,उपवास ,फलाहार ,कन्याभोज की व्यवस्था बनानी हैं ....

एल्लो$$$ उसके तुरंत बाद
राम नवमी भी आ जायेगी तो बुराई पर अच्छाई की जीत की फुलझड़ी ,फटाके भी फोड़ने पड़ेंगे,रिश्तेदारों में मिठाई,गिफ्ट भी बांटनी पड़ेगी| आखिर कितने कष्ट और वनवास सहकर,शबरी के जूठे बेर खा कर दुष्ट रावण का वध किया था बेचारे मर्यादापुरुषोत्तम नें हमारे लिए ,कोई मामूली बात है |क्या हम पटाखे भी नहीं फोड़ सकते राम जी की याद में ?
फिर 'बेचारे 'बालक प्रहलाद की पिता के अहंकार पर विजय की शक्ति का एहसान भी चुकाना है होलिका दहन करके |उसमें भी गुझिया-उझिया बनती है और महंगे रंगों,भांग ,ठंडाई इत्यादि का बज़ट भी बनाना पड़ेगा ..उस समय तो खोया भी बहुत महंगा हो जाता हैगा|हाँ नईं तो !
और अभी इन सबके बीच में सर्दियों की सहालग -शादी ,जन्मदिन और रिटायरमेंट पार्टी में दावत ,दारू ,पार्टी का खर्चा है सो अलग ! अबकी बार वैसे भी अन्ना और रामदेव के भ्रष्टाचार मुहिम में भी कुछ सोशल टाइप के लोगों नें झंडा फहरा -फहरा कर नेशनली इमोशनल अत्याचार कर -कर के कंट्रीब्यूशन ले ही लिया था तो इस महीने भी बड़ा टाईट ही बीता है ..अभी बच्चों का एडमीशन ,किताबें ,उनके फ्रेंड्स की पार्टी,,,उफ़$$

अरे-अरे !!! ये तो बड़े खर्चे आने वाले हैं दोस्तों ,"चलिए अपने -अपने आफिस में कुछ रिश्वतखोरी हो जाए ...और दुकानों में कुछ घटतौली कुछ कालाबाजारी कर ली जाये,ठेकेदारी में कमीशनखोरी कर ली जाए ,नेतागीरी और पत्रकारिता के नाम पर कोतवाली में दलाली खा ली जाए ..कुछ को नौकरी दिलाने का झांसा दे कर बेवकूफ बना लिया जाए .. कुछ का शारीरिक शोषण भी कर लिया जाए " तो क्या ज्यादा बुरा है !
अब हम तो सिर्फ इसलिए कह रहे कि इतनी महंगाई में केवल ईमानदारी की तनख्वाह के दम से कैसे मैनेज करेंगे यार इत्ते "परोपकार "

नहीं तो सारे समाज सारी मानवता के फायदे के लिए कैसे हम इन पवित्र शक्तियों का आवाहन कर पायेंगे ..फिर तो हम धर्म प्रिय और ईश्वर में आस्था रखने के अधिकारी ही नहीं रह जायेंगे !!!
कहीं कोई हमें नास्तिक और धर्म विरोधी ना समझ ले ..जबकि हम ठहरे घनघोर पैतृक सदाचारी प्रभु भक्त !! है ना ???
जय श्री कृष्ण ...जय श्री राम ..जय साईं राम ...हरे हरे

विशेष टिप्पणी :यह केवल व्यंग्य रचना है| ईश्वर और धर्म के वास्तविक स्वरुप को न समझकर केवल कर्मकांडी अन्धविश्वास और ईश्वर अवतरण की उम्मीद के सहारे आत्मबल हीन स्वार्थी जीवन काटते हिन्दू जन -मन को झकझोरने हेतु |ऐसा नहीं कि ये कुरीतियाँ केवल हिन्दू धर्म के उपासकों में ही हैं ये अकर्मण्यता और हीनता मुसलमानों ,ईसाइयों ,सिखों ,जैनियों ,बौद्धों, इत्यादि सबमें हैं पर में चूंकि स्वयं हिन्दू हूँ इसलिए केवल अपने घर के लोगों के बारे में ही बोलने का साधिकार रखता हूँ किसी और पर नहीं |इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण कारण और भी है कि हिन्दू धर्म सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक है उसमें उसकी मान्यताओं के विरुद्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर कोई पाबंदी या सज़ा नहीं |किसी धर्माधीश मुल्ला - मौलवी को फतवा जारी करने का हक नहीं |
पर फिर भी मेरी रचना का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना कतई नहीं |
में स्वयं ईश्वर के आध्यात्मिक स्वरुप के प्रति आस्था और वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्ण निष्ठा रखता हूँ |मुझे हिन्दू होने पर गर्व है |
************* वन्दे मातरम् ..जय हिंद************

Tuesday, December 13, 2011

अन्ना मी अन्ना का कर्मकांड

"भय बिनु होत न प्रीत गुसाईं " सो ,जन लोकपाल केवल एक संभावित कानूनी उपाय मात्र है सरकारी किस्म के भ्रष्टाचार के लिए ... पर यदि आप व्यापक सामजिक व्यवस्था परिवर्तन हेतू चिंतित हैं ...तो सावधान !!! वह लक्ष्य प्राप्त करना केवल इन सरकारी विधियों के वश की बात नही..हाँ ये सहायक वातावरण अवश्य निर्मित करेंगे ...पर उस पवित्र अभीष्ट प्राप्ति हेतू सामाजिक कानूनों की आवश्यकता पडेगी ...जो भ्रष्ट व्यक्ति का सामजिक बहिस्कार करें ..भ्रष्टाचारी के घर परिवार में शादी- विवाह सम्बन्ध करना बंद करें ...हमें(समाज को ) दो लोगों के नितांत व्यक्तिगत जीवन संबंधों में जो चरित्र हीनता दिखाई देती है उसकी परिभाषाओं को बदलना चाहिये ..उन दो लोगों के सम्बन्ध तो केवल दो परिवारों को ही प्रभावित करते हैं पर भ्रष्टाचार जैसा कुकृत्य एक सामजिक बलात्कार है ..अतः इसे करने वाले को सबसे बड़ा चरित्रहीन माना जाए ....फिर देखिये कैसे ''गधे के सिर से सींग जैसा'' गायब होता है भ्रष्टाचार ...लेकिन यह तभी संभव है जब समेकित और समवेत धार्मिक ,सामुदायिक प्रयास इसकी पहल करें ...अब सोचिये.... क्या ये कर सकते हैं हम ..या सिर्फ मी अन्ना मी अन्ना का कर्मकांड करना है ;;;

Saturday, November 5, 2011

व्यावसायिक शिक्षा

स्वागतयोग्य है ...कि नई रोज़गार मांगों के अनुरूप CBSE या अन्य राज्य बोर्ड PROFESSIONAL शिक्षा के लिए अपने अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव की चहलकदमी कर रहे हें ..जाहिर है कि सरकार के अभिकर्ता के रूप में ये एजेंसियां समाज के युवा ढाँचे के भविष्य के प्रति चिंतित हें ..यहाँ बस मेरी जिज्ञासा इतनी सी है कि आज उच्च तकनीकी शिक्षा में दक्ष किये जाने के बाद भी IIT और अन्य तकनीकी ,व्यावसायिक संस्थानों के मेधावी छात्र आत्महत्या कर रहे हें और ये दुःखद घटनाएं क्रमशः बढ़ रही हें ..ऐसे में क्या इनकी रोज़गार संभावनाओं की सैद्धांतिक जरूरतों के सिवा वास्तविक संवेदनशीलता के स्तर पर भी कुछ पहल अपेक्षित है ??

आत्मप्रशंसा

आत्मप्रशंसा मनुष्य की मूल प्रवृत्ति है ..यह निराशा और दूसरों के द्वारा असहयोग किये जाने के समय सकारात्मक साधन के रूप में प्रयोग किये जाने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि करती है पर जब यह खुद साध्य हो जाती है तो हमारे खुद के अस्तित्व के लिए विष बनती है ,परिणामतः हम पूरे समाज के लिए घातक सिद्ध होने लगते हैं ...अतः इस औषधि का नियंत्रित प्रयोग ही लाभकारी है ..