नयी नयी सरकारें चाहे किसी के नेतृत्व में बने ,कितना भी ईमानदार CM PM हो वो केवल मुखौटा तो हो सकता है सरकार का ..लेकिन पूरी सरकार नहीं
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नयी सरकार कोई भी प्रशासनिक सुधार /पुलिस सुधार /शैक्षिक सुधार /आफिस सिस्टम में सुधार नहीं कर पायेगी क्यूंकि हर बार की तरह नयी सरकार भी ऐसे विधायक सांसदों से बनेगी जो जनहित में नहीं बल्कि अपने फ़ायदे के लिए करोड़ों खर्च करके चुनाव जीतेंगें
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जब तक सरकार निर्माण की इकाई एक-एक MLA /MP खुद अच्छा नहीं होगा अच्छी सरकार की कल्पना भी अर्थहीन है | सरकारी मंत्रालयों के टीवी और अखबारी विज्ञापन के कलर बदलने या उनकी भाषा का फ्लेवर बदलने या चली आ रहीं पिछली सरकारी योजनाओं के नामकरण बदलने से व्यवस्था में फर्क कैसे आएगा,आप ही सोचिये
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कृपया याद रखिये कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक विस्तृत विविधतापूर्ण धार्मिक भौगोलिक संस्कृतियों के भारतीय संसदीय लोकतंत्र को एक अधिनायक प्रवृत्ति अपने हिसाब से कभी नही चला सकती और ये बात आप अगले पांच साल के सरकार के कार्यकाल को देखकर खुद ही समझ जायेंगे
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आप लोकतंत्र को स्वयं समझने की चेष्टा करें इसमें तन मन धन से समय निकालकर भागीदार बनें न कि इसे राजनैतिक दलों के हिसाब से समझें
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मित्रों आगामी विधानसभा चुनावों और आगामी लोकसभा चुनाव में ईमानदार संसद के गठन के लिए अपनी कमर आज से ही कसें |
आपका ध्येय केवल सादगीपूर्ण ईमानदार व्यक्ति को वोट देना होना चाहिए

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