## " यदा-यदा हि धर्मस्य " ##
कल आधी रात तक जाग कर मटकी -बटकी फोड़-फाड़ कर कान्हां की डिलीवरी तो करा दी भाई बड़ी मेहनत से !चलो एक बड़ा काम निपटा |
@ अब आइये उनके बड़े होकर सुदर्शन चक्र धारी कृष्ण बनने तक चुप्पी साध जाते हैं ?
भाई तभी तो वो हमारे " यदा-यदा हि धर्मस्य " के तोता रटंत सपने को पूरा करेंगे, समाज के भ्रष्टाचारियों और हमारी मासूम बहिन बेटियों के बलात्कारियों का वध करेंगे ?
खैर आइये अपन लोग
कल आधी रात तक जाग कर मटकी -बटकी फोड़-फाड़ कर कान्हां की डिलीवरी तो करा दी भाई बड़ी मेहनत से !चलो एक बड़ा काम निपटा |
@ अब आइये उनके बड़े होकर सुदर्शन चक्र धारी कृष्ण बनने तक चुप्पी साध जाते हैं ?
भाई तभी तो वो हमारे " यदा-यदा हि धर्मस्य " के तोता रटंत सपने को पूरा करेंगे, समाज के भ्रष्टाचारियों और हमारी मासूम बहिन बेटियों के बलात्कारियों का वध करेंगे ?
खैर आइये अपन लोग
तो
अब
आने वाली नवरात्रि की तैयारी करते हैं ...आखिर दुर्गा माँ जी की दुष्टों के संहार करने की शक्ति का भी तो आवाहन करना है ...व्रत ,उपवास ,फलाहार ,कन्याभोज की व्यवस्था बनानी हैं ....
एल्लो$$$ उसके तुरंत बाद
राम नवमी भी आ जायेगी तो बुराई पर अच्छाई की जीत की फुलझड़ी ,फटाके भी फोड़ने पड़ेंगे,रिश्तेदारों में मिठाई,गिफ्ट भी बांटनी पड़ेगी| आखिर कितने कष्ट और वनवास सहकर,शबरी के जूठे बेर खा कर दुष्ट रावण का वध किया था बेचारे मर्यादापुरुषोत्तम नें हमारे लिए ,कोई मामूली बात है |क्या हम पटाखे भी नहीं फोड़ सकते राम जी की याद में ?
फिर 'बेचारे 'बालक प्रहलाद की पिता के अहंकार पर विजय की शक्ति का एहसान भी चुकाना है होलिका दहन करके |उसमें भी गुझिया-उझिया बनती है और महंगे रंगों,भांग ,ठंडाई इत्यादि का बज़ट भी बनाना पड़ेगा ..उस समय तो खोया भी बहुत महंगा हो जाता हैगा|हाँ नईं तो !
और अभी इन सबके बीच में सर्दियों की सहालग -शादी ,जन्मदिन और रिटायरमेंट पार्टी में दावत ,दारू ,पार्टी का खर्चा है सो अलग ! अबकी बार वैसे भी अन्ना और रामदेव के भ्रष्टाचार मुहिम में भी कुछ सोशल टाइप के लोगों नें झंडा फहरा -फहरा कर नेशनली इमोशनल अत्याचार कर -कर के कंट्रीब्यूशन ले ही लिया था तो इस महीने भी बड़ा टाईट ही बीता है ..अभी बच्चों का एडमीशन ,किताबें ,उनके फ्रेंड्स की पार्टी,,,उफ़$$
अरे-अरे !!! ये तो बड़े खर्चे आने वाले हैं दोस्तों ,"चलिए अपने -अपने आफिस में कुछ रिश्वतखोरी हो जाए ...और दुकानों में कुछ घटतौली कुछ कालाबाजारी कर ली जाये,ठेकेदारी में कमीशनखोरी कर ली जाए ,नेतागीरी और पत्रकारिता के नाम पर कोतवाली में दलाली खा ली जाए ..कुछ को नौकरी दिलाने का झांसा दे कर बेवकूफ बना लिया जाए .. कुछ का शारीरिक शोषण भी कर लिया जाए " तो क्या ज्यादा बुरा है !
अब हम तो सिर्फ इसलिए कह रहे कि इतनी महंगाई में केवल ईमानदारी की तनख्वाह के दम से कैसे मैनेज करेंगे यार इत्ते "परोपकार "
नहीं तो सारे समाज सारी मानवता के फायदे के लिए कैसे हम इन पवित्र शक्तियों का आवाहन कर पायेंगे ..फिर तो हम धर्म प्रिय और ईश्वर में आस्था रखने के अधिकारी ही नहीं रह जायेंगे !!!
कहीं कोई हमें नास्तिक और धर्म विरोधी ना समझ ले ..जबकि हम ठहरे घनघोर पैतृक सदाचारी प्रभु भक्त !! है ना ???
जय श्री कृष्ण ...जय श्री राम ..जय साईं राम ...हरे हरे
विशेष टिप्पणी :यह केवल व्यंग्य रचना है| ईश्वर और धर्म के वास्तविक स्वरुप को न समझकर केवल कर्मकांडी अन्धविश्वास और ईश्वर अवतरण की उम्मीद के सहारे आत्मबल हीन स्वार्थी जीवन काटते हिन्दू जन -मन को झकझोरने हेतु |ऐसा नहीं कि ये कुरीतियाँ केवल हिन्दू धर्म के उपासकों में ही हैं ये अकर्मण्यता और हीनता मुसलमानों ,ईसाइयों ,सिखों ,जैनियों ,बौद्धों, इत्यादि सबमें हैं पर में चूंकि स्वयं हिन्दू हूँ इसलिए केवल अपने घर के लोगों के बारे में ही बोलने का साधिकार रखता हूँ किसी और पर नहीं |इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण कारण और भी है कि हिन्दू धर्म सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक है उसमें उसकी मान्यताओं के विरुद्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर कोई पाबंदी या सज़ा नहीं |किसी धर्माधीश मुल्ला - मौलवी को फतवा जारी करने का हक नहीं |
पर फिर भी मेरी रचना का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना कतई नहीं |
में स्वयं ईश्वर के आध्यात्मिक स्वरुप के प्रति आस्था और वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्ण निष्ठा रखता हूँ |मुझे हिन्दू होने पर गर्व है |
************* वन्दे मातरम् ..जय हिंद************
अब
आने वाली नवरात्रि की तैयारी करते हैं ...आखिर दुर्गा माँ जी की दुष्टों के संहार करने की शक्ति का भी तो आवाहन करना है ...व्रत ,उपवास ,फलाहार ,कन्याभोज की व्यवस्था बनानी हैं ....
एल्लो$$$ उसके तुरंत बाद
राम नवमी भी आ जायेगी तो बुराई पर अच्छाई की जीत की फुलझड़ी ,फटाके भी फोड़ने पड़ेंगे,रिश्तेदारों में मिठाई,गिफ्ट भी बांटनी पड़ेगी| आखिर कितने कष्ट और वनवास सहकर,शबरी के जूठे बेर खा कर दुष्ट रावण का वध किया था बेचारे मर्यादापुरुषोत्तम नें हमारे लिए ,कोई मामूली बात है |क्या हम पटाखे भी नहीं फोड़ सकते राम जी की याद में ?
फिर 'बेचारे 'बालक प्रहलाद की पिता के अहंकार पर विजय की शक्ति का एहसान भी चुकाना है होलिका दहन करके |उसमें भी गुझिया-उझिया बनती है और महंगे रंगों,भांग ,ठंडाई इत्यादि का बज़ट भी बनाना पड़ेगा ..उस समय तो खोया भी बहुत महंगा हो जाता हैगा|हाँ नईं तो !
और अभी इन सबके बीच में सर्दियों की सहालग -शादी ,जन्मदिन और रिटायरमेंट पार्टी में दावत ,दारू ,पार्टी का खर्चा है सो अलग ! अबकी बार वैसे भी अन्ना और रामदेव के भ्रष्टाचार मुहिम में भी कुछ सोशल टाइप के लोगों नें झंडा फहरा -फहरा कर नेशनली इमोशनल अत्याचार कर -कर के कंट्रीब्यूशन ले ही लिया था तो इस महीने भी बड़ा टाईट ही बीता है ..अभी बच्चों का एडमीशन ,किताबें ,उनके फ्रेंड्स की पार्टी,,,उफ़$$
अरे-अरे !!! ये तो बड़े खर्चे आने वाले हैं दोस्तों ,"चलिए अपने -अपने आफिस में कुछ रिश्वतखोरी हो जाए ...और दुकानों में कुछ घटतौली कुछ कालाबाजारी कर ली जाये,ठेकेदारी में कमीशनखोरी कर ली जाए ,नेतागीरी और पत्रकारिता के नाम पर कोतवाली में दलाली खा ली जाए ..कुछ को नौकरी दिलाने का झांसा दे कर बेवकूफ बना लिया जाए .. कुछ का शारीरिक शोषण भी कर लिया जाए " तो क्या ज्यादा बुरा है !
अब हम तो सिर्फ इसलिए कह रहे कि इतनी महंगाई में केवल ईमानदारी की तनख्वाह के दम से कैसे मैनेज करेंगे यार इत्ते "परोपकार "
नहीं तो सारे समाज सारी मानवता के फायदे के लिए कैसे हम इन पवित्र शक्तियों का आवाहन कर पायेंगे ..फिर तो हम धर्म प्रिय और ईश्वर में आस्था रखने के अधिकारी ही नहीं रह जायेंगे !!!
कहीं कोई हमें नास्तिक और धर्म विरोधी ना समझ ले ..जबकि हम ठहरे घनघोर पैतृक सदाचारी प्रभु भक्त !! है ना ???
जय श्री कृष्ण ...जय श्री राम ..जय साईं राम ...हरे हरे
विशेष टिप्पणी :यह केवल व्यंग्य रचना है| ईश्वर और धर्म के वास्तविक स्वरुप को न समझकर केवल कर्मकांडी अन्धविश्वास और ईश्वर अवतरण की उम्मीद के सहारे आत्मबल हीन स्वार्थी जीवन काटते हिन्दू जन -मन को झकझोरने हेतु |ऐसा नहीं कि ये कुरीतियाँ केवल हिन्दू धर्म के उपासकों में ही हैं ये अकर्मण्यता और हीनता मुसलमानों ,ईसाइयों ,सिखों ,जैनियों ,बौद्धों, इत्यादि सबमें हैं पर में चूंकि स्वयं हिन्दू हूँ इसलिए केवल अपने घर के लोगों के बारे में ही बोलने का साधिकार रखता हूँ किसी और पर नहीं |इसके अतिरिक्त एक महत्वपूर्ण कारण और भी है कि हिन्दू धर्म सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक है उसमें उसकी मान्यताओं के विरुद्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर कोई पाबंदी या सज़ा नहीं |किसी धर्माधीश मुल्ला - मौलवी को फतवा जारी करने का हक नहीं |
पर फिर भी मेरी रचना का उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना कतई नहीं |
में स्वयं ईश्वर के आध्यात्मिक स्वरुप के प्रति आस्था और वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय संस्कृति के प्रति पूर्ण निष्ठा रखता हूँ |मुझे हिन्दू होने पर गर्व है |
************* वन्दे मातरम् ..जय हिंद************

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वन्दे मातरम् ..जय हिंद
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